दिल्ली में समाधि स्थल पर गरमाई सियासत: पूर्व पीएम मनमोहन सिंह की स्मृति पर क्यों छिड़ा विवाद, जानें नियम और प्रक्रिया

पंचतत्व में विलीन हुए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह


पूर्व पीएम मनमोहन सिंह की समाधि स्थल पर गरमाई सियासत। जानें दिल्ली में समाधि स्थल बनाने के नियम, प्रक्रिया और विवाद की वजह।

नई दिल्ली: पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन के बाद उनके समाधि स्थल को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री के लिए उपयुक्त स्थल का चयन नहीं करना उनका अपमान है। वहीं सरकार का कहना है कि प्रक्रिया चल रही है और जल्द ही उचित स्थान तय किया जाएगा।

इस बीच, यह सवाल उठता है कि दिल्ली में समाधि स्थल बनाए जाने के लिए नियम क्या हैं और यह प्रक्रिया कैसे पूरी होती है? आइए जानते हैं समाधि स्थलों से जुड़े नियम, उनकी प्रक्रिया और विवाद की वजह।

दिल्ली में समाधि स्थल के लिए कौन होते हैं पात्र?

दिल्ली में समाधि स्थल केवल उन्हीं व्यक्तित्वों के लिए बनाए जाते हैं जिनका योगदान राष्ट्रीय और ऐतिहासिक महत्व का हो। इसके लिए चार श्रेणियां तय की गई हैं:

1. भारत के राष्ट्रपति


2. भारत के प्रधानमंत्री


3. भारत के उप-प्रधानमंत्री


4. अन्य राष्ट्रीय महत्व के व्यक्तित्व


राजघाट और उसके आसपास के परिसर को राष्ट्रीय समाधि स्थल के रूप में चिह्नित किया गया है। लेकिन यहां जगह की कमी के चलते केवल चुनिंदा नेताओं के लिए ही समाधि स्थल का चयन होता है।

समाधि स्थल बनाने की प्रक्रिया

समाधि स्थल निर्माण की प्रक्रिया में कई चरण शामिल होते हैं।

1. राजघाट क्षेत्र समिति: समाधि स्थल के लिए पहला निर्णय राजघाट क्षेत्र समिति लेती है। यह समिति संस्कृति मंत्रालय के अधीन आती है।


2. संस्कृति मंत्रालय: समिति के सुझावों की समीक्षा के बाद मंत्रालय प्रस्ताव तैयार करता है।


3. भूमि आवंटन: आवास और शहरी मामलों का मंत्रालय समाधि स्थल के लिए भूमि आवंटित करता है।


4. सुरक्षा मंजूरी: गृह मंत्रालय सुरक्षा और राजकीय सम्मान से जुड़ी प्रक्रियाओं को सुनिश्चित करता है।


5. अंतिम स्वीकृति: दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) और राजघाट क्षेत्र समिति समाधि स्थल निर्माण को अंतिम मंजूरी देती है।

2013 में बदला नियम, सियासत की नई वजह

2013 में केंद्र सरकार ने समाधि स्थल निर्माण की नीति में बदलाव किया। इसमें स्पष्ट किया गया कि केवल अत्यंत विशिष्ट योगदान देने वाले व्यक्तित्वों के लिए ही समाधि स्थल बनाया जाएगा। इसके पीछे तर्क था कि भूमि का संतुलित उपयोग और पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।

विवाद की जड़: मनमोहन सिंह की समाधि

कांग्रेस का आरोप है कि पूर्व पीएम मनमोहन सिंह जैसे महान नेता के लिए सरकार तुरंत निर्णय नहीं ले रही, जो उनकी असंवेदनशीलता दिखाता है। वहीं, सरकार का कहना है कि प्रक्रिया में समय लगना स्वाभाविक है और जल्द ही उचित स्थान का चयन होगा।

राजनीति का नया मोड़

इस विवाद ने भारतीय राजनीति में नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्या समाधि स्थल पर राजनीति उचित है?

क्या समाधि स्थलों की आवश्यकता को पुनः परिभाषित किया जाना चाहिए?

क्या यह समय समाधि स्थल निर्माण की प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाने का है?

पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के समाधि स्थल को लेकर छिड़ी सियासत भारतीय राजनीति में एक संवेदनशील मुद्दा बन गई है। समाधि स्थल बनाने की प्रक्रिया चाहे जितनी भी जटिल हो, लेकिन यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि ऐसे मुद्दे राजनीतिक विवाद का विषय न बनें।

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